Thursday, August 16, 2012

दो बीघा आसमान !!


दो बीघा आसमान !
दो बीघा.......सिर्फ़ दो बीघा आसमान
दिला दो ना मुझे :)


एक-एक अठन्नी, जोड़ जोड़, जिसकी कीमत
मैने हो चुकाई.......
बड़े प्यार से, अपनीपिग्गी बॅंकजब
मैने टुड-वाई !


चाँद सा सफ़ेद, हो जो
सोने जैसा खरा.....
दीवारें उसकी पंख जैसीऔर
बादलों से हो भरा :)


दरवाज़े पे, नक्काशी हो मनमोहक
और उस पर.....नाम लिखा हो मेरा
भीतर आते ही, आए खुशबू
सीटी, सू-सू गाए.....और खाने को
ललचाए......दिल मेरा :)


रंग बिरंगे, हवा में, झूमते पर्दे
धीमे से, जो गिरा दे तुम्हें.....
मखमली सी...........
आवारा बिस्तरे पे :)

गुद-गुदाते तकिये से फिर, दोस्ती हो जाए
सारे ज़माने के 'जोक्स' याद जायें.....
ग़ुब्ब-आरे सा मन, गद-गद हो जाए
और धीमे-धीमे, मीठी नींद, तुम्हें जाए !


'भोर', तुम्हें आहिस्ता-आहिस्ता, जगाए
डाल पे बैठ, छोटी-छोटी चिड़िया,
चू-चू कर, कहानियाँ सुनाए......

फूलों की क्यारियाँ हो, बिखरी
यहाँ-वहाँ
हो बड़ा सा एक, झूला भी
पानी में तैरती, मनचली मछलियाँ....


यह सब.....
मिलकर हैं बनाते....
एक खूबसूरत घर....
मेरे दो बीघा आसमान......पर !!

~~~~


3 comments:

Rupa said...

aa toh rahi hai....:) bat hi baat

achala nupur said...


yeh blog post bas "ek kavita" nahi, balki ek bahut sunder ehsaas hai !

Ek ehsaas, jise maine, abhi kuch dinon pehle, hi adopt kiya hai :)

n as they say;
"......and they lived happily ever after !"

:)
>>>

achala nupur said...


thanks Rupa n Ajay !

- ek maze ki baat aur:
'agar dhyaan se yeh blog-post padho, toh tumhein maaloom hoga......ki saari baatein ho maine likhi hain, vo sab mere aas-paas hi saans le rahi hai......"

~~~~ !